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Short Hindi Motivational Story

नमश्कार दोस्तो,
आज हम बडी ही सीधी लेकिन बहोत ही मन लुभाने वाली कहानीया है। Short Hindi Motivational Story
य़े छोटी छोटी कहानिया आपको जिवन के बडे बडे फेसले लेने मे मदत करते है।
तो आज में आपको ऐसी ४ कहानीया बताने वाला हुं। जो आपको मनोरंजीत भी करेगी और आपको जिवन में प्रोत्साहीत भी करेगी।

Short Hindi Motivational Story

समय की कीमत – Short Hindi Motivational Story

सन १९७४ में पाकिस्तान का निर्माण हुआ | इसके कुछ दिनों बाद अमरीका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री लियाकत अली को अमरीका आने का निमंत्रण दिया |

Short Hindi Motivational Story
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लियाकत अली की वहां बड़ी आवभगत हुई | उन्हें अनेक दर्शनीय स्थल दिखाए गए | राष्ट्रपति ने उनसे कहा , “हमारी नौसेना युद्ध का अभियास करने वाली हैं |आप चाहे तो एस अभ्यास को देख सकते हैं |” लियाकत अली ने देखने की इच्छा प्रकट की |

नौसेना एक अधिकारी ने उनसे कहा , “हमारा युद्धपोत तट से दूर खड़ा रहेगा | प्रातः ७ बजे पोत रवाना होगा | आप उसके पहले तट पर आ जायें |वहां सरकारी अधिकारी और एक नौसेनिक अधिकारी आपके स्वागतार्थ रहेंगे | वे मोटर बोट से आपको हमारे पोत तक पहुंचा देंगे |”

निर्धारित दिन अधिकारीगण तट पर प्रात: साढ़े छ बजे उपस्थित हो गये और लियाकत अली की प्रतीक्षा करने लगे | युद्धपोत तट से कुछ मील दूर गहरे समुद्र में खड़ा था | उसका तट पर स्थित अधिकारियों से निरंतर वायरलेस से सम्पर्क था |

पौने सात बजे युद्धपोत के कप्तान ने पूछा की क्या अतिथि आ गये हैं |तट से उसे सूचित किया गया कि वे अभी नहीं आये हैं |जब सात बजने में एक मिनट रह गया तब पुनः पूछा गया और कप्तान को बताया गया की अतिथि अभी नहीं आये हैं |

ठीक सात बजे कप्तान ने तट पर यह वायरलेस सन्देश भेजा – He is Late , I cannot wait (उन्हें देर हो गई है | मैं अब प्रतीक्षा नहीं कर सकता) ऐसा कहकर उसने युद्धपोत रवाना कर दिया |

कुछ मिनटों के बाद लियाकत अली तट पर पहुंचे |उन्हें बताया गया की पोत ठीक सात बजे रवाना हो गया , तो वे निराश होकर लोट गये |

अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा –

बादशाह अकबर के दिमाग में तरह-तरह की बातें आती रहती थीं। दरबार में वह बैठे हुए थे और वरबारियों से बातें करने में मशगूल थे। तभी अचानक उन्होंने दरबारियों से सवाल कर दिया, “खुदा न करे अगर सबकी दाढ़ी में आग लग जाए और उसमें मैं भी शामिल होऊं तो आप सब सबसे पहले किसकी दाढ़ी की आग बुझाना चाहेंगे?” दरबारियों में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, फिर अधिकांश दरबारियों ने समवेत स्वर में कहा, “जहांपनाह की दाढ़ी की।

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” शहंशाह को दरबारियों की बात पर यकीन नहीं हुआ। उन्होंने बीरबल की ओर देखा। वह खामोश बेठे हुए थे।

शहंशाह ने बीरबल से पूछा, “बताओ बीरवल, किसकी दाढ़ी की आग पहले बुझाओगे?” बीरवल बोले, “जहांपनाह, सच्चाई तो यही है कि मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा, फिर दूसरे की दाढ़ी के बारे में सोचुंगा।” बीरबल ने आत्मविश्वास से कहा।

बादशाह अकबर ने बीरवल को गर्व से देखा और कहा, “बीरबल तुम एक हाजिरजवाब ही नहीं, बल्कि एक सच्चे व्यक्ति भी हो। बाकी लोग मुटझे खुश करने के लिए झूठ बोल गहे थे. जबकि हर व्यक्ति पहले अपने बारे में ही सोचता है। हम तुम्हारे इस जवाब से बहुत खुश है, बीरबल।” यह कहकर शहंशाह चुप हो गए। वह बीरवल की स्पष्टवादिता मे बहुत ही खुश थे।

नदी पति के घर जा रही है – Short Hindi Motivational Story

वर्षा ऋ्तु थी। यमुना नदी में बाढ़ आई थी। लहरें किनारे पर आकर टकरा रही थीं, जिससे अजीब सी ‘छप-छप’ की आवाज होती थी। शहंशाह अकबर का महल यमुना तट पर ही था। बादशाह गहरी नींद में सोए हुए थे। रात का सन्नाटा चारों तरफ फैला पड़ा था। छप-छप की आवाज जब बादशाह के कानों में पड़ी तो वह जाग गए और छप-छप की आवाज सुनने लगे।

फिर इसके बाद बादशाह को नींद नहीं आई तो वह कमरे में ही उठकर टहलने लगे। टहलते-टहलते वह खिड़की के पास आ गए और पानी से लबालब भरी यमुना नदी को अपलक देखने लगे। लहरों की छप-छपाहट अभी भी उनके कानों में गूंज रही थी। तभी उन्हें ऐसा जान पड़ा जैसे नदी रो रही हो।

शहंशाह के मन में सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर क्या बात है। रात के सन्नाटे में सब सो रहे हैं मगर नदी क्यों रो रही है? अपने इस प्रश्न का जवाब वह नहीं ढूंढ़ सके तो बिस्तर पर आकर चुपचाप लेट गए। दूसरे दिन शहंशाह दरबार में आए तो सभी दरबारियों से यही प्रश्न किया कि नदी रोती क्यों है? बारी-बारी से सभी दरबारियों ने अपनी समझ के अनुसार जवाब दिया लेकिन किसी के भी जवाब से बादशाह को संतुष्टि नहीं मिली। इसी बीच बीरबल दरबार में पधारे।” बादशाह ने बीरबल को देखते ही सवाल कर दिया, “बताओ बीरबल, नदी क्यों रोती है?”

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बीरबल इस बेतुके सवाल पर कुछ देर तक हतप्रभ खड़े रहे फिर उन्होंने कहा, “जहांपनाह, मैं आपके सवाल का जवाब तभी दे सकता हूं जब मैं नदी का रोना अपने कानों से सुनूंगा।’ “बीरबल, नदी के रोने की आवाज तो मैं तुम्हें रात के सन्नाटे में ही सुना सकता हूँ।” बादशाह ने यह कहकर बीरबल को देखा। बीरबल रात होने पर शहंशाह के महल में पहुंचे। बादशाह उन्हें अपने महल की खिड़की के पास ले गए और वह छप-छप’ की आवाज उन्हें सुनाई और इसका कारण पूछा।

बीरबल अगले पल ही यह समझ गए कि यह तो पानी के बहने की आवाज है और वादशाह ने इसे ही नदी का रोना मान लिया है। बीरबल झुककर बड़े ही विनम्र स्वर में बोले, “हुजूर, नदी अपने पिता के घर यान पहाड़ से विदा होकर अपने पति यानी समुद्र के यहां जा रही है, जिससे वह पिता से अलग होने के गम में रोती जा रही है।’ बीरबल का जवाब इतना सटीक और हकीकत भरा था कि बादशाह अकबर खुशी के मारे गद्गद हो गए और कहा, “बीरबल, तुम्हारे पास तो हर सवाल का जवाब होता है। हम तुम्हारे जवाब से संतुष्ट हुए।”

बादशाह के अनमोल सवाल –

शहंशाह अकबर की एक खासियत थी कि वो जब वह फुर्सत में होते थे, तब तरह-तरह के विचार उनके मन में उत्पन्न हो जाया करते थे और फिर वह दरबारियों से उनका समाधान पूछते थे। बीरबल आज दरबार में नहीं थे। शहंशाह ने दरबारियों से पूछा, “दूध किसका अच्छा होता है, फूल किसका अच्छा होता है, पत्ता किसका अच्छा होता है, कौन राजा अच्छा है और हमारे राज्य कि मिठाई किसकी अच्छी है?”

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शहंशाह के सवाल सुनते ही दरबारी आपस में बाते करने लगे। किसी दरबारी ने गाय के दूध को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने भैंस का और किसी ने बकरी का दूध अच्छा बताया। इसी तरह से किसी दरबारी ने गुलाब का फूल अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने कमल का। किसी दरबारी ने केले के पत्ते को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने नीम के पत्ते को अच्छा बताया।

किसी दरबारी ने राजा कौन अच्छा के जवाब में शहंशाह को अच्छा बताया और अंतिम सवाल के जवाब में किसी दरबारी ने गन्ना को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने अंगुर को और किसी दरबारी ने मिष्ठान को अच्छा बताया, लेकिन बादशाह अकबर उनके जवाब संतुष्ट नहीं हुए।

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तभी बीरबल दरबार में आ गए। बीरबल के आनेपर बादशाह के चेहरे पर उनको देखते ही चमक आ गई। बीरबल के बैठने से पहले ही शहंशाह ने उपरोक्त पांचों सवालों के जवाब पूछे। बीरबल ने कुछ पल तक शांत रेहके सभी सवाल पुरी शांती से सुने, फिर बोले, “जहांपनाह, मां का दूध शरीर के लिये सबसे अच्छा और हितकारी होता है।

कपास से मिलने वाला फुल सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इससे सबके शरीर ढक जाते हैं। पान का पत्ता सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इसे खाकर दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं। राजाओं में इन्द्र सबसे अच्छे हैं , क्योंकि उनके आदेश से ही बारिश होती है। बारिश से खेती बाडी में अच्छेसे धन-धान्य में वृद्धि होती है और पूरे प्राणियों की प्यास बुझती है। और मिठास वाणी सबसे अच्छी होती है, क्योंकि जिसकी वाणी में मिठास होती है, वह सारे जगत को अपने वश में कर लेता है।

“शहंशाह ने सिंहासन से उठकर बीरबल को गले से लगा लिया और कहा, “बीरबल, तुमने अपने जवाब से मुझे खुश कर दिया।

आशा है कि आपको यह Short Hindi Motivational Story लेख पसंद आया होगा, अगर आप ऐसी और कहानी सुनना पसंद करते हो तो हमें कमेंट में जरुर बतायेगा।