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Best Shayari On Life – Sad, Love (Urdu)

Best Shayari on life – By Famous Shayari writers, Mirza Ghalib, Javed Akhtar, Rahat Indori, Aitbar Sajid, and Ameer Minai

Best Shayari On Life –

Hazaaron Khwahishen Aisi (A Thousand Desires Such) By Mirza Ghalib

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले,

बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर

वो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले

निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिन

बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

भ्रम खुल जाये जालीम तेरे कामत कि दराजी का

अगर इस तुर्रा-ए-पुरपेच-ओ-खम का पेच-ओ-खम निकले

मगर लिखवाये कोई उसको खत तो हमसे लिखवाये

हुई सुबह और घर से कान पर रखकर कलम निकले

हुई इस दौर में मनसूब मुझसे बादा-आशामी

फिर आया वो जमाना जो जहाँ से जाम-ए-जम निकले

हुई जिनसे तव्वको खस्तगी की दाद पाने की

वो हमसे भी ज्यादा खस्ता-ए-तेग-ए-सितम निकले

मुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने का

उसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले

जरा कर जोर सिने पर कि तीर-ऐ-पुरसितम निकले

जो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले

खुदा के बासते पर्दा ना काबे से उठा जालिम

कहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफिर सनम निकले

कहाँ मयखाने का दरवाजा ‘गालिब’ और कहाँ वाइज़

पर इतना जानते हैं, कल वो जाता था के हम निकले

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकलेबहुत निकले मेरे अरमाँ,

लेकिन फिर भी कम निकले..!!

Best Shayari On Life
Mirza Ghalib Sahab

Rahat Indori Log Har Mod Pe – Best Shayari On Life

लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है..

इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों है !

मैं ना जुगनू हूँ दिया हूँ ना  कोई तारा हूँ

रौशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं !

नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से..

ख्वाब आ – आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं !

मोड़ तो होता हैं जवानी का संभलने के लिये..

और सब लोग यही आकर फिसलते क्यों हैं !

Munawwar Rana:-Bulandi Der Tak Kis Shakhsh Ke Hisse Me Rahti Hai

बुलंदी देर तक किस शख्श के हिस्से में रहती है,

बहुत ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है !

ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,

मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ सज़दे में रहती है !

जी तो बहुत चाहता है इस कैद-ए-जान से निकल जाएँ हम,

तुम्हारी याद भी लेकिन इसी मलबे में रहती है !

अमीरी रेशम-ओ-कमख्वाब में नंगी नज़र आई,

गरीबी शान से एक टाट के परदे में रहती है !

मैं इंसान हूँ बहक जाना मेरी फितरत में शामिल है,

हवा भी उसको छू के देर तक नशे में रहती है !

मोहब्बत में परखने जांचने से फायदा क्या है,

कमी थोड़ी बहुत हर एक के शज़र में रहती है !

ये अपने आप को तकसीम कर लेते है सूबों में,

खराबी बस यही हर मुल्क के नक़्शे में रहती है !

Ameer Meenai:-Sarakti Jaye Hai Rukh Se Naqaab Aahista Aahista

सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता,

निकलता आ रहा है आफताब आहिस्ता आहिस्ता !

जवान होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा,

हया यकलख्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता !

शब्-इ-फुरक़त का जागा हूँ फरिश्तों अब तो सोने दो,

कभी फुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता !

सवाल-इ-वस्ल पर उनको उदू का खौफ है इतना,

दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता !

हमारे और उम्हारे प्यार में बस फर्क है इतना,

इधर तो जल्दी जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता !

वो बेदर्दी से सर काटे “अमीर” और मैं कहूं उन से,

हुज़ूर आहिस्ता, आहिस्ता जनाब, आहिस्ता आहिस्ता !

Aitbar Sajid:-Juda Bhi Hone Ka Andesha Seh Nahi Sakte

जुदा भी होने का अंदेशा सेह नहीं सकते, 

हम एक शहर में अब खुश भी रह नहीं सकते !

यह रोज़-ओ-शब हैं हमारे के एक दूसरे से, 

छुपाये फिरते हैं अहवाल, कह नहीं सकते !

शाकिस्त-इ-ज़ात का इज़हार चाहते भी नहीं, 

अजीब हाल है, हम चुप भी रह नहीं सकते !

हक़ीक़तों की चट्टानें भी अपनी राह में हैं, 

ख्याल-ओ-खाव्ब के दरिया में बह नहीं सकते !

वह बेक़सूर है, ऐसी भी कोई बात नहीं, 

कसूरवार हैं हम, यह भी कह नहीं सकते !

Javed Akhtar Ghazal Jidhar Jaate Hai Sab – Best Shayari On Life

जिधर जाते हैं सब उधर जाना अच्छा नहीं लगता,

मुझे पामाल  रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता !

ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना  हामी भर लेना,

बहुत हैं फ़ायदे इसमें मगर अच्छा नहीं लगता !

मुझे दुश्मन से भी ख़ुद्दारी की उम्मीद रहती है,

किसी का भी हो सर क़दमों में सर अच्छा नहीं लगता !

बुलंदी पर इन्हें मिट्टी की ख़ुशबू तक नहीं आती,

ये वो शाखें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता !

ये क्यूँ बाक़ी रहे आतिश-ज़नों ये भी जला डालो,

कि सब बेघर हों और मेरा हो घर अच्छा नहीं लगता !!

क्या खूब लिखा है किसी ने Shayri On Life

क्या खूब लिखा है किसी ने,

बख्श देता है खुदा उनको जिनकी किस्मत ख़राब होती है,

वो हरगिज़ नहीं बख्शे जाते है जिनकी नियत ख़राब होती है..!!

न मेरा एक होगा न तेरा लाख होगा,

न तारीफ तेरी होगी न मज़ाक मेरा होगा,

गरूर न कर शाही शरीर का,

मेरा भी खाक होगा तेरा भी खाक होगा..!

ज़िंदगी भर ब्रांडेड ब्रांडेड करने वालो,

याद रखना कफ़न का कोई ब्रांड नहीं होता..!!

कोई रो कर दिल बहलाता है,

और कोई हंस के दर्द छुपता है,

क्या करामात है कुदरत का जिन्दा इंसान पानी में डूब जाता है,

और मुर्दा तैरकर दिखता है..!!

मौत को देखा तो नहीं पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी, 

कम्ब्खत जो भी उससे मिलता है जीना छोड़ देता है..!!

गजब की एकता देखी लोगो की ज़माने में, 

जिन्दों को गिराने में और मुर्दों को उठाने में..!!

ज़िन्दगी में न जाने कौनसी बात आखरी होगी,

न जाने कौनसी रात आखरी होगी,

मिलते झूलते बातें करते रहो यारों एक दूसरें से, 

न जाने कौनसी मुलाकात आखरी होगी..??

क्या खूब लिखा है किसी ने, Best Shayari On Life

प्यास लगी थी गजब की, 

मगर पानी मे जहर था,

पीते तो मर जाते और ना पीते तो भी मर जाते !

बस यही दो मसले,

जिंदगीभर ना हल हुए,ना नींद पूरी हुई,

ना ख्वाब मुकम्मल हुए !

वक़्त ने कहा…काश थोड़ा और सब्र होता,

सब्र ने कहा…काश थोड़ा और वक़्त होता !

सुबह सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहेब,

आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर !

“हुनर” सड़कों पर तमाशा करता है,

और “किस्मत” महलों में राज करती है !

शिकायते तो बहुत है तुझसे ऐ जिन्दगी,

पर चुप इसलिये हु कि जो दिया तूने, 

वो भी बहुतो को नसीब नहीं होता !

अजीब सौदागर है ये वक़्त भी, 

जवानी का लालच दे के बचपन ले गया,

अब अमीरी का लालच दे के जवानी ले जाएगा !

लौट आता हूँ वापस घर की तरफ… हर रोज़ थका-हारा,

आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हूँ या काम करने के लिए जीता हूँ !

थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी

मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे !

भरी जेब ने  “दुनिया ” की पहेचान करवाई और खाली जेब ने  “अपनो ” की,

जब लगे पैसा कमाने तो समझ आया, 

शौक तो मां-बाप के पैसों से पुरे होते थे,

अपने पैसों से तो सिर्फ जरूरतें पुरी होती है !

हंसने की इच्छा ना हो, 

तो भी हसना पड़ता है,

कोई जब पूछे कैसे हो …? 

तो मजे में हूँ कहना पड़ता है !

Sad Life Quotes in English

ये ज़िन्दगी का रंगमंच है दोस्तों, 

यहाँ हर एक को नाटक करना पड़ता है ,

“माचिस” की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती, 

यहाँ आदमी आदमी से जलता है !

दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट, 

ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा कि जीवन में मंगल है या नहीं !

मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ,

कि पत्थरों को मनाने में , 

फूलों का क़त्ल कर आए हम ,

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने , 

वहाँ एक और गुनाह कर आए हम !!

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